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MAHPHIL KI JAJAM

तुम्हारे लिए

तुम्हारे लिए ♥️ जाने कब  तुम्हारे लिए  झरे धरा पे फूल पारिजात  स्वप्न नयनों में  और होठ गाने लगे  प्रेम धुन मधुर गीत सुबह की सुनहरी  किरणों संग जाने कहाँ  तुम्हारे लिए  रटता रहा पपीहा  मंडराने लगे  भँवरे तितलियों पर  और दुपहरी  चमकीली  महके चंदन बन जाने क्यूँ  तुम्हारे लिये  धरा गगन को चाह नही मिलन की  फिर भी,मन कहे क्षितिज पर  साँझ बेला में  सजा दू सितारे बालों में तुम्हारे  जाने कैसे गहरे नील  समन्दर में  उतरे चाँद चाँदनी  मिले हम तुम  ख़ुशबूओं  बिखरीं  रात निशीगंधा :निर्मला सिवानी 
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में कहा हूं

#व्यथा यशोधरा  मैं कहाँ हूँ .. सुनो सिद्धार्थ, जब तुम खोज रहे थे जीवन मे दुख का कारण तब मैं जूझ रही थी नन्हे राहुल के मासूम सवालों से वो सवाल, जो उसके पिता के लिए थे। तुम थे व्यथित मृत्यु से  तुम थे  व्यथित बीमारी से  तुम व्यथित थे बुढ़ापे से.. कहाँ जान पाए तुम कि व्यथा इन सबसे परे होती है.. मृत्यु दुख नही है, मृत्यु तो मुक्त करती है दुख जीवन होता है वह जीवन जो साथी के पलायन के बाद  पीछे बचता है.. बुढ़ापा तो सिर्फ प्रकृति की एक अवस्था है। अभिशप्त तो यौवन होता है जो तुम्हारे जाने के बाद मेरे पास था.. शरीर के रोग का तो फिर भी इलाज है, पर मन का रोग जो तुम छोड़ गए मेरे पास तुम्हारे दर्शन में उसका कोई जिक्र आया या नही.. मेरे परोसे थाल को ठुकराकर आखिर तुमने ग्रहण किया  सुजाता की खीर का पात्र। क्या तब भी नही गुन सके कि भूख एक शास्वत सत्य है। तुम्हारे बौद्ध विहार में आम्रपाली सी नगर वधू भी स्थान पा सकी नही समा पाए तो बस पत्नी और पुत्र? इस दुःख का भी दर्शन खोज सके हो क्या? सुनो सिद्धार्थ, दसो दिशाओं  दिग-दिगांतर तक विस्तृत हुआ तुम्हारा दर्शन तुम्हारा ...

तुम.... मैं (मैं....तुम)

॥तुम॥ तुम , मुझमें जीती हुई भाषा प्रीत की  आलौकिक अहसास है मुझे कि  मैं  उतना ही  पूर्ण हूँ तुमसे , जितनी माँ पार्वती शिव से , मीरा कृष्ण से , नदियाँ पानी से , तितलियाँ पुष्प पराग से, बसंत झरे हुए पारिजात से, सप्तर्षि तारामंडल आकाश से , कहाँ न तुमसे  अन्तर्श्चेतना हो जीती हुई मेरी ,लौकिक प्रीत का तुम.. :निर्मला सिवानी

बहार जब फूल लिखती है....

मुक़दमा-ए-चम्पई चम्पा ..🍃 अलसायी अमलतास दोपहरी में  मैं महका महका चम्पा.. बहक कर, इस गुलाबी शहर में  गुलाबी हुआ जाता हूँ.. इक तप्तकांचनवर्णा , चुस्त सुबह अपनी खिड़की से.. तांक झांक तांक झांक करती हैं  और मेरा चम्पई रंग चुरा.. साँझ में जब मन्दिर के घण्टियाँ  बजतीं है.. तब मेरे साये में चल चल के मेरी ख़ुशबू से सराबोर होती हैं  मी लार्ड..🍃 : निर्मला सिवानी

परिजात

जाने कब  तुम्हारे लिए  झरे धरा पे फूल पारिजात  स्वप्न नयनों में  और होठ गाने लगे  प्रेम धुन मधुर गीत सुबह की सुनहरी  किरणों संग जाने कहाँ  तुम्हारे लिए  रटता रहा पपीहा  मंडराने लगे  भँवरे तितलियों पर  और दुपहरी  चमकीली  महके चंदन बन जाने क्यूँ  तुम्हारे लिये  धरा गगन को चाह नही मिलन की  फिर भी,मन कहे  क्षितिज पर  साँझ बेला में  सजा दू सितारे बालों में तुम्हारे ॥ :निर्मला सिवानी

होली पर हाइकु....

हाईकू होली पे उड़े गुलाल चहुँओर उमंग होली पी संग  रंगे बहार दस्तक फागुन की  होली आई रे राधिका संग खेले रास बिहारी  आई होली रे इस होली में  खेल रंग पी संग उसी की होली  गुलाल सी मैं  चली पी नगरियाँ  इस फाल्गुन :,निर्मला सिवानी 

क्या आप पूजा स्थल के दर्शन करने जा रहे है...

धार्मिक स्थलों में प्रवेश से पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें ।।* एन. सुगालचन्द जैन,  चेन्नई, तमिलनाडु 1. किसी भी पवित्र स्थान में प्रवेश से पूर्व यह सुनिश्चित करें की आप तन -मन से स्वच्छ हैं । पवित्र स्थान में प्रवेश से कम से कम 48 घंटे पूर्व माँसाहारी भोजन, शराब, तम्बाकू आदि नशीले पदार्थों का सेवन करने से बचें । 2.  पवित्र स्थान में नंगे पैर प्रवेश करें  3. निर्धारित ड्रेस कोड का सम्मान करते हुए ड्रेस कोड धारण कर पूजा स्थल में प्रवेश करें ।   4. पवित्र स्थलों पर ऐसे परिधान पहन कर प्रवेश नहीं करें जिनसे शारीरिक अंग प्रदर्शित होते हो । 5. ऐसे स्थानों पर फोटो नहीं ले जहाँ फोटोग्राफी की अनुमति नहीं हो । 6. पवित्र स्थलों के वातावरण का सम्मान करें, ऐसा कोई कार्य नहीं करें जो उस पवित्र स्थल के सुन्दर, सौम्य, शांत वातावरण के अनुकूल नहीं हो । 7. जब पूजा-अर्चना हो रही हो तो पूजा में विघ्न नहीं डालें, आप अपना दायित्व समझते हुए बिना शोर-शराबे के एक तरफ खड़े हो जायें और पूजा-अर्चना होने के पशचात दर्शन करें ।