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Showing posts from June 13, 2020

तुम्हारे बिना.....

🌺वजह     ढ़लकर शामें...  तुम्हारे बाज़ुओं से... इक नई सुबह को...  जन्म देती हैं ! और गुज़र कर...  रात के मुसाफ़िर... इक नये सफ़र को...  निकलते हैं ! मैं तुम्हारे बिना...  इक मायूस ग़ज़ल  तुम मेरे बिना... इक उदास नज़्म ! रंगों की हसीन वादियाँ...  मेरे साये... वहीं कुदरतन ख़ूबसूरती...  तुमसे है ! कोई और न यहाँ मेरे...  तुम्हारे बिना , के ग़र कुछ है तो वो... बेवजह सा है ! जैसे बहारों का होना...  तुम्हारी इक ज़रूरत... और मेरा , तुम्हारे बिना होना ज़िन्दगी , एक मशक़्क़त ... मेरे सरताज                ❤ :निर्मला सेवानी