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Showing posts from June 8, 2020

आभार तुम्हारा-----निर्मला सिवानी

जीवन धुरी 🌺 उकेरा है आज फिर तुम्हें, धीमें धीमे  नर्म अहसासों में.. वक़्त ने थोड़ी करवटें ली, आसमानी आँखों में मेरी  बरसों बाद उतरे प्यार पुनः  धीरे -धीरे  तुम्हारे लिये.. सराहती रही  कामयाबी को तुम्हारी , क़दम दर क़दम .. हताश हुई मैं जब, सम्भालते रहे तुम हरदम.. कमाल हुनर है तुममें मुझे  यूँ खिलखिला देने का  बेला सी महक दर महक साँसें मेरी.. शामिल हो मुझमें यूँ जैसे सोच भी तुम ओर नज़रिया भी तुम जताऊँ कैसे आभार तुम्हारा  शब्द दर शब्द.. पर ये ज़रूर है तुम हो तो मैं हूँ  क्योंकि तुम जीवन  धुरी हो मेरी ओ मेरे सरताज.. :निर्मला सिवानी

तेरा वादा!

वादा जान कर दी तुम्हारे हवाले करके वादा नहीं छोड़ जाना मुझे  जान कर दी तुम्हारे हवाले करके वादा नहीं छोड़ जाना मुझे तोड़ आएं दीवारें सभी हम तुम अगर कहो, हाथ छोड़ूँ ना तेरा कभी करके वादा नहीं छोड़ जाना मुझे तेरे संग संग चलूँ मैं जहां में मुझको लगता है यूँ, जैसे सिमटा हो सागर मुझी में करके वादा नहीं छोड़ जाना मुझे जान कर दी तुम्हारे हवाले करके वादा नहीं छोड़ जाना मुझे  जान कर दी तुम्हारे हवाले करके वादा नहीं छोड़ जाना मुझे बबिता अग्रवाल कँवल