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Showing posts from June 16, 2020

यह कैसी ख्वाहिश!

तमगों की दुनिया, कुछ पाने की ख्वाहिश, कुछ दिखाने की आदत,  कुछ ना मिले तो, बुदबुदाने की जहमत, शिकवों की थाली, जहन में कुदाली, ये छुपी कोई गुपचुप सी पहेली, नादानी में अठखेली, बाबा ने भांपा, दिल में खटकता कांटा, तीर निशाने पे साधा,  बिना पहुंचाएं बाधा, चरणधूलि शीश नवाया, क्या दोष प्रसाद उसने पाया , पाने गई , लुटा के आई,  प्रिय से थी तेरी बेवफ़ाई, क्यूं मारती बाहर में फाके, कुछ तो अपने दिल में झांकें। :प्रेम सिंगी(दिल्ली)

किस्से बाबागिरी के....

#बाबागीरी_और_स्त्रियों का शोषण  पहला किस्सा  “मैं तुमसे प्यार करता हूँ।”  यह उसने कहा जिसे वह भगवान मानती थी। वह कुछ जवाब देती उसके पहले ही वह बोला- “मैं तुम्हारे जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ भर देना चाहता हूँ। यूँ भी तुम मेरे लिए मन वच तन से समर्पित हो।”  वह समझ ही नहीं पाई कि क्या करे क्या कहे, वह सोच ही रही थी कि उनके होठ पहले उसके गाल पर आये और फिर उसके होठ पर आ गये। वह अभी तक सदमे में थी मगर वह अपने काम में लग गया था। जब तक वह लड़की सदमे से बाहर आती तब तक वह अपना काम कर चुका था।  वह जब संभली तो उसने कमरे से बाहर जाकर सबको सच बताने के लिए कहा तो वह तथाकथित बाबा जोर जोर से हँसने लगा। उसने तुरंत कोने में पड़ी घड़ी उठाई जिसमें हिडन कैमरा था और साथ में मेमरी कार्ड, खुद को उसके साथ इस मुद्रा में देख, (जिसमें केवल वह दिख रही थी उस बाबा का चेहरा नहीं) जिसे भगवान माना था वह लड़की खून के आँसू रोने लगी। या तो वह बदनाम हो सकती थी या उसे बदनाम करने के नाम पर भी वह खुद ही बदनाम हो सकती थी।  क्या करती वह, बदनामी का डर, क्योंकि जानती थी कि इनके भक्तों की कत...