(लज्जा) लज्जा नारी का गहना है ये शब्द जरूर किसी पुरुष के मुख से ही निकला प्रतीत होता हैं अपनी सहूलियत के लिए वह नारी को लज्जा का गहना हर घड़ी पहनने को मजबूत करता है इसके जीते जागते उदाहरण देखने को मिल जाते है पांच वर्षीय लड़की नेहा के पिता जब शराब पीकर आते है तो नेहा सहम जाती है वह उसकी मां के साथ मार पीट करते है गाली गलौज करते है जानवरो की तरह उसकी मां को पीटते है पर नेहा कुछ नहीं कर पाती क्युकि वह बच्ची है किन्तु उसकी मां वो तो बच्ची नहीं है वो तो परिपक्व है वह भी सब सहन करती है क्युकी पिता अन्नदाता है उसका आदर करना उसकी मजबूरी है लज्जा के कारण वे अपनी जबान बंद रखती हैं नेहा का नाज़ुक मन भी पिता से नफ़रत करता है पर वो विरोध नहीं कर पाती पिता के रूप में वे पुरुष से नफ़रत करती हैं रमा जो किशोरावस्था में है बचपन से साथ खेलने वाले अपने भाई से परेशान है वे उसके...