तुम्हारे लिए ♥️ जाने कब तुम्हारे लिए झरे धरा पे फूल पारिजात स्वप्न नयनों में और होठ गाने लगे प्रेम धुन मधुर गीत सुबह की सुनहरी किरणों संग जाने कहाँ तुम्हारे लिए रटता रहा पपीहा मंडराने लगे भँवरे तितलियों पर और दुपहरी चमकीली महके चंदन बन जाने क्यूँ तुम्हारे लिये धरा गगन को चाह नही मिलन की फिर भी,मन कहे क्षितिज पर साँझ बेला में सजा दू सितारे बालों में तुम्हारे जाने कैसे गहरे नील समन्दर में उतरे चाँद चाँदनी मिले हम तुम ख़ुशबूओं बिखरीं रात निशीगंधा :निर्मला सिवानी