नारी तेरी व्यथा अनमोल || नारी तेरी व्यथा अनमोल वश में नहीं है हर इक के | जान सके जो तेरा पीड़ा दर्द हैं तेरा सागर से गहरा सुरक्षित नहीं थी इस जहां में हो गई माँ की कोख असुरक्षित || छीप ही गया है बचपन तेरा Banner Title: Cyber Monday Week Price Storm Continues, Gifts and $0.1 Snap up खनखनाहट भी खो गयी हैं तेरी || लुट जाती सरेआम है अस्मत भाई रावण सा यहां नहीं कोई है || ब्याह के जाती ससुराल को तुम झोंक दी जाती अग्नि में ज़िंदा || है पराकाष्ठा सहनशक्ति की तेरी ममता हुई ना कींजित विचलित || प्यार का गहरा सागर बसा है दिल में अथाह दर्द भरा हैं || नवजीवन को देने वाली हर रंग में तु ढलने वाली || नारी तेरी व्यथा अनमोल नारी तेरी व्यथा अनमोल || बबिता अग्रवाल कँवल