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Showing posts from June 21, 2020

घोसला उम्मीदों का....

घोंसला उम्मीदों का चिड़िया ताकती है घोंसले को कि जिसे बनाया था उसने बड़ी मेहनत से, तप कर भींग कर संघर्ष कर जहां उसने बच्चों को जन्म दिया देखा है मैंने उस चिडियां को अपनी चोंच में बच्चों के लिए खाना लाते, बडे प्रेम से खिलाते, आज बच्चे इतने बडे हो गए भरने लगे उड़ान अपने  आंगन में, और आंगन के बाहर  ऊपर आसमान में भी वो चिडियां मानो कुछ बोल रही हो, मानों कुछ समझा रही हो रूको, अभी इतना मत उड़ो पहले दुनियादारी समझो लोगों को पहचानों, अपना बनाकर कैसे ठग  लेते है लोग. नहीं माने! आखिर उड़ गए  बच्चे चिडियां घोंसले में मौन उदास सी मानों यादों को सहेज कर रख रही हो उनके लौटने की आस लिए.....सीमा भावसिहंका