Skip to main content

Posts

Showing posts from January 25, 2021

पत्नियों का वक्त के साथ बदलता स्वभाव।सोचना जरूर पर हंसना मना है।

वक्त के साथ पत्नियों के बदलते स्वभाव.....क्या आप सहमत है! सोचना जरूर पर हंसना मना है साहिब। साभार: सोशल मीडिया -श्री कमल बेद(चेन्नई)से प्राप्त संदेश। 💎 *पत्नियों का विकास क्रम* 💎 *1960  में -* पति :- एक कप चाय..!! पत्नी - (पहले से... लिए खड़ी मिलती थी) *1970 में -* पति :- एक कप चाय.!! पत्नी :- अभी लाई जी... *1980 में -* पति :- एक कप चाय..!! पत्नी :-  लाती हूँ..। *1990 में -* पति :- एक कप चाय..!! पत्नी :-  ला रही हूँ , थोड़ा सब्र रखो... *2000 में -* पति :- एक कप चाय..!! पत्नी :- लाऊँगी अभी.., सीरियल में... ब्रेक आने दो... *2010 में -* पति :- एक कप चाय..!! पत्नी :-  हल्ला न करो, खाली होकर देती हूँ... नहीं तो खुद ही बना के पी लो... *Now a days - 2021*                                                              पति :- एक कप चाय..!! पत्नी :- क्या कहा.....?? पति :- एक कप चाय बनाने जा रहा था, सोचा तुमसे भी.. पूछ लूँ..,...

दिन वो भी खास था यह भी खास है

दिन वो भी खास था दिन यह भी खास है... अगर वो दिन(15अगस्त1947) न आया होता अगर वीर शहीदों ने अपनी शहादत की आहुतियां दे कर देश को फिरंगियों से आजाद न करवाया होता तो फिर आज का दिन आजाद देश का संविधान नहीं लिखा जाता। इसलिए पहला सम्मान उन अमर शहीदों के नाम जिनके खून की कीमत पर आजादी मिली थी। दूसरा सम्मान उन मनीषियों के नाम जिनकी  दूरदृष्टी की बदौलत देश का संविधान मिला था और देश को गणतंत्र का आधार मिला था और विश्व मे एक नया मान मिला था। पर अफसोस हम न तो शहीदों की शहादत का ख्याल रख पाए है.. न ही मनीषियों से दिए संविधान का सम्मान रख पाए है! इस देश को वक्त वक्त पर बाहरी लोगों ने लुटा पर तब क्या कहे अपने भी उनसे बदतर निकले... अब निर्णय कीजिए क्या हम हमारे राष्ट्रीय पर्वों को उनकी मर्यादा,गरिमा के अनुरूप मन से मनाते है या ओपचारिक हो जाते है....? आज का दिन क्या मन को टटोलने का नहीं है! माफ़ कीजिएगा गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ एक कड़वा सवाल रख रहा हूं।