: शारदीय नवरात्रि माने वर्षा ऋतु का समाप्ति और शरद ऋतु का आगमन.. इन दिनों प्रकृति में गुणात्मक ऊर्जा का संचार अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक तेज़ी से होता है इस नव संचरित ऊर्जा का उपयोग कर हम स्वयं को नव पल्लवित कर अपने जीवन एंव आस-पास को परिष्कृत कर अपनी देह को स्वस्थ रख सकते है मन स्थिति को शांत रख सकते है बुद्धि को तीव्र कर अपने जीवन के सही निर्णय ले सकते है व अपने पराक्रम पुरूषार्थ से पदार्थों की सृष्टि कर हम स्वयं को न केवल इस लोक में प्रतिष्ठित कर उस आलोक में स्वयं को विस्तार दे सकते है... पहले तीन नवरात्र रज गुणात्मक ऊर्जा के होते ,जिससे पदार्थ की सृष्टि होती है इन दिनों हम माँ महालक्ष्मी की आराधना कर देह व वित सम्बन्धी पदार्थ को आकृष्ट करते है जैसे...अन्न धन वाहन पराक्रम ऐश्वर्य कीर्ति वैभव आरोग्य इत्यादि ..! ४,५,६ नवरात्रि सत्वगुण ऊर्जा से परिपूर्ण होती है इन दिनों माँ वीणावादिनी की उपासना की जाती है जो वाक् सिद्धि ,विद्या , बुद्धि व समस्त कलाओं की अधिष्ठात्री है यशदायिनी है तेजोमय है जो हमारे आभामंडल को परिष्कृत कर इस लोक में प्रतिष्ठित कर उस आलोक में विस्तार देती है ...