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Showing posts from October 15, 2018

स्वागत --महफिल में।

अहसासों की महफिल में आइये शब्दों से दिल की दिलों को कह जाइये इस महफिल को गांव की चौपाल सी बना दीजिये वो अपनत्व का मिजाज बना दीजिये गीत,कविता,गजल,नज्म जरूरी नही -इनसे ही कहाँ जाए सीधी-सपाट भी सुना दीजिये महफिल की इस जाजम पर आप सबका स्वागत। एक कोशिश -- जाजम बिछाने की भावों के प्रवाह में डुबकी लगाने की। सवाल जबाब से रोमांचित हो जाने की NOT ME TOO...... शब्दों के दरिया में----WE TOO......