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Showing posts from May 29, 2020

तुलसी के पौधे की देखभाल कैसे करे!

*🍃 तुलसी के पौधे की देखभाल !*                साभार: प्रीतिका मोजूमदार     _तुलसी का पौधा हर घर में होना चाहिए : पौराणिक आख्यानों के कारण नहीं, इसके पर्यावरणीय और औषधीय गुणों का कारण। हिन्दू समाज के तकरीबन हर घर में यह पौधा होता है।_ तुलसी के पौधे की उम्र लगभग दो से ढाई साल होती है। इसके बाद पौधा कमजोर होकर सूखने लगता है। इस बीच तुलसी के पौधे से पके हुए बीज मिट्टी में गिरते रहते हैं। बारिश के मौसम में ये बीज अंकुरित हो जाते है और नए पौधे फूट आते हैं जो स्वस्थ होते हैं।   तुलसी के बीज लगभग 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर अंकुरित होते हैं। आप खुद भी तुलसी के बीज मिट्टी में दबाकर नए पौधे तैयार कर सकते हैं। *बीज से तुलसी कैसे लगायें :*     बीज से तुलसी लगाने के लिए अप्रैल का महीना उपयुक्त होता है। इसके लिए खाद मिश्रित मिट्टी पर तुलसी के बीज बिखेर दें।  अब इस पर लगभग चौथाई इंच की मिट्टी की परत चढ़ा दें।  इसके बाद इस पर पानी छिड़क दें।  पानी का छिडकाव रोज करें।    बहुत ज्यादा पानी नहीं डालें।...

गाय की महत्ता को समझिए...

*जो मात्र विज्ञान और स्वार्थ (धन) की कसौटी पर गाय को कसते रहेंगे...* *वो गाय के नाश के षड़यंत्र में फंसते रहेंगे...*  साभार:प्रीतिका मोजूमदार सन्तान धर्म की मूल आधार शक्ति गौमाता है जो वैदिक भारत से लेकर श्री राम कृष्ण भगवान जी द्वारा सदैव धर्म से जुड़ी रही, पूज्य रही, प्रतिष्ठित रही, माँ की संज्ञा से जगविदित रही जो मूल कारण है जिसने गौमाता के आशीष को आज तक वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाया है।  गाय को कभी भूलवश भी पशु समझना तो दूर कहना भी नही चाहिए, गाय हमारी माँ है और यही भाव सबसे महत्वपूर्ण है जो ऋषि मुनियों, साधु-संतों, देवो, भगवानों द्वारा   गाया गया है, इसलिये इसके सामने सब अन्य कारण गौरक्षा के व्यर्थ, खोखले है जिसमे विज्ञान आधारित उपयोगिता, और अर्थव्यवस्था हेतु गौधन जुड़ा है क्योंकि पहला भाव ही माँ बेटे के भाव का होता है उसके उपयोग और स्वार्थ का नही। जबकि यह बात बिल्कुल उपयुक्त है और होना ही चाहिये कि गौमाता हमारी अर्थव्यवस्था को ऋण मुक्त बनाने, स्वास्थ्य को परिपूर्ण करने तथा कृषि को परिष्कृत कर भारत को विश्वगुरु बना सकती है क्योंकि वह कामधेनु है ल...

एक कहानी जो आपकी सोच को बदल सकती है।

एक लघु कथा :प्रीतिका मोजूमदार   भविष्य कथन की विभिन्न विधाओं (टेरो कार्ड, अंक ज्योतिष व रेकी हीलर के साथ साथ अध्यात्म के विभिन्न सन्दर्भो को अपने शब्दों से आवाज देने में अहम भूमिका निभा रही है। ये कहानी आपके जीने की सोच बदल देगी! एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया।  वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।।   किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।   सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया.. अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत क...

भगवती की ऐतिहासिक कथा

*राजा विक्रमादित्य की कुल देवी हरसिद्धि माता की कथा । : प्रीति मजूमदार 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ उज्जयिन्यां कूर्परं व मांगल्य कपिलाम्बरः। भैरवः सिद्धिदः साक्षात् देवी मंगल चण्डिका। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माता सती के पिता दक्षराज ने विराट यज्ञ का भव्य आयोजन किया था जिसमें उन्होंने सभी देवी-देवता व गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया । परन्तु उन्होंने माता सती व भगवान शिवजी को नहीं बुलाया । फिर भी माता सती उस यज्ञ उत्सव में उपस्थित हुईं । वहां माता सती ने देखा कि दक्षराज उनके पति देवाधिदेव महादेव का अपमान कर रहे थे । यह देख वे क्रोधित हो अग्निकुंड में कूद पड़ीं । यह जानकर शिव शंभू अत्यंत क्रोधित हो उठे और उन्होंने माता सती का शव लेकर सम्पूर्ण विश्व का भ्रमण शुरू कर दिया । शिवजी की ऐसी दशा देखकर सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार मच गया । देवी-देवता व्याकुल होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और संकट के निवारण हेतु प्रार्थना करने लगे । तब शिवजी का सती के शव से मोहभंग करने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाया था । चक्र से माँ सती के शव के कई टुकड़े हो गए । उनमें से १३वा टुक...