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Showing posts from August 12, 2020

आँखे

ग़ज़ल-- रदीफ़ (आँखें ) हरिक हाल दिल का बताती हैं आँखें  दिलों को दिलों से मिलाती हैं आँखें जो कल तक गुज़रती थीं नज़रें बचा कर  वो छुप छुप के हमसे  लड़ाती हैं आँखें भटक जाता जाने मैं किस रास्ते पर सदा राहे-मंज़िल दिखाती हैं आँखें ज़रा मुस्कुरा कर जो देखा पलट कर  अजब दिल में हलचल मचाती हैं आँखें समझदारी चलती नहीं इनके आगे उतर कर ये दिल में नचाती हैं आँखें निखर आता है दौरे -माज़ी का मंज़र  कफ़स में भी जब याद आती हैं आँखें ग़ज़ल मैंने छेड़ी है जब जब भी *साग़र* बड़े नाज़ से गुनगुनाती हैं आँखें  🖋️विनय साग़र जायसवाल  12/8/2020
हिमाचल  का एक युवा साधक ललित जी बंगलोर की क्रिया से गदगद क्यो हो गया... सुनिये उसकी ही जुबानी... . उपरोक्त लिंक को क्लिक करते हुए हिमाचल के युवा देवी साधक के मन की आवाज को सुनिये...वीडियों को लाइक व शेयर करना न भूलिए। PLEASE SUBSCRIBE &JOIN (DIGITAL FIRST NEWS) संजय सनम 72780 27381