आजादी की वर्ष गांठ के वर्ष गिनने छोड़ दिए अब हमने गद्दारों के दिए जख्म रिसने छोड़ दिए सद्भावना के नाम पर चोटे अब और बर्दाश्त नहीं अब हमने शुरवीरों के फोलादी हाथ खुले छोड़ दिए... : आजादी के महापर्व पर शहीदों को नमन संजय सनम ( संपादक फर्स्ट न्यूज)