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Showing posts from March 3, 2023

बहार जब फूल लिखती है....

मुक़दमा-ए-चम्पई चम्पा ..🍃 अलसायी अमलतास दोपहरी में  मैं महका महका चम्पा.. बहक कर, इस गुलाबी शहर में  गुलाबी हुआ जाता हूँ.. इक तप्तकांचनवर्णा , चुस्त सुबह अपनी खिड़की से.. तांक झांक तांक झांक करती हैं  और मेरा चम्पई रंग चुरा.. साँझ में जब मन्दिर के घण्टियाँ  बजतीं है.. तब मेरे साये में चल चल के मेरी ख़ुशबू से सराबोर होती हैं  मी लार्ड..🍃 : निर्मला सिवानी

परिजात

जाने कब  तुम्हारे लिए  झरे धरा पे फूल पारिजात  स्वप्न नयनों में  और होठ गाने लगे  प्रेम धुन मधुर गीत सुबह की सुनहरी  किरणों संग जाने कहाँ  तुम्हारे लिए  रटता रहा पपीहा  मंडराने लगे  भँवरे तितलियों पर  और दुपहरी  चमकीली  महके चंदन बन जाने क्यूँ  तुम्हारे लिये  धरा गगन को चाह नही मिलन की  फिर भी,मन कहे  क्षितिज पर  साँझ बेला में  सजा दू सितारे बालों में तुम्हारे ॥ :निर्मला सिवानी

होली पर हाइकु....

हाईकू होली पे उड़े गुलाल चहुँओर उमंग होली पी संग  रंगे बहार दस्तक फागुन की  होली आई रे राधिका संग खेले रास बिहारी  आई होली रे इस होली में  खेल रंग पी संग उसी की होली  गुलाल सी मैं  चली पी नगरियाँ  इस फाल्गुन :,निर्मला सिवानी