फ़लसफ़ा 💕 दरमियाँ जो तेरे मेरे , सरहद की दूरियाँ है, अब क्या मैं इन फासलों की चुभन लिखूँ .. क्या अपने दिल की मैं , धड़कन लिखूँ.. मेरे हर फलसफे में तू ही है तो, क्यों न तुझे मैं जिंदगी की अपनी , इबादत लिखूँ.. तेरे साथ का अहसास होता है हरदम मेरे साथ, अपने रुहानी इश्क़ का क्यों न, मैं ये जतन लिखूँ.. तू है , इक गुलाब और तेरी यादों की हवा है यहाँ, खुशबू में तेरी ओ मेरे सरताज मैं खुद को मगन लिखू.. 🌺 :निर्मला सेवानी