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Showing posts from June 11, 2020

अधरों की भाषा सुनिये सरताज

तुम मेरी भाषा..🌷 बरसों इन्तज़ार में  तुम्हारे, मैं .. कब से भूल बैठी हूँ  अपनी आवाज़ की पहचान.. भाषा सीखी थी मैंने जो , मनुष्य बनने के लिये .. उसके सारे अक्षर जोड़कर भी मैं.. बमुश्किल तुम्हारा नाम ही  बना सकी.. बहुत देर हुई, वर्ण अपनी ध्वनि खो बैठे हैं  साल हुये ! अब मैं लिखती नहीं-तुम्हारे अंगों की सिर्फ़  परछाईं पकड़ती हूँ.. क्या देखा है , तुमने कभी  लकीरों को बग़ावत करते ? मेरे हाथों से  हर अक्षर तुम्हारी तस्वीर बन उभरता है.. ओ  मेरे सरताज                      ❤️ :निर्मला सेवानी

क्या यह प्रलय की आहट तो नहीं है!

_समय~ चिंतन_ क्या शुरू हो गया है धरती पर जीवन के अंत का दौर?*         (प्रीतिका मजूमदार-+91 98103 81345)    _ वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती सामूहिक विलुप्ति के छठे दौर में दाखिल हो चुकी है और इंसान इसके शुरुआती चरण में ही लुप्त हो सकता है. लगभग साढ़े चार अरब साल पुरानी हमारी धरती ने पिछले 54 करोड़ सालों के दौरान सामूहिक विलुप्ति के पांच दौर देखे हैं._        वैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसे हर दौर में पृथ्वी से 50 फीसदी से ज्यादा प्रजातियों का सफाया हो गया. इस तरह की पांचवीं घटना करीब साढ़े छह करोड़ साल पहले तब हुई थी जब दूसरे कई जीवों के साथ डायनासोर भी गायब हो गए थे.  वैज्ञानिकों का एक वर्ग कुछ समय से कहता रहा है कि अब धरती पर सामूहिक विलुप्ति का छठवां दौर शुरू हो गया है और खतरा यह है कि इंसान इसकी शुरुआत में ही गायब हो सकता है.    अब हाल ही में अमेरिका स्थित चर्चित संस्था *नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज* ने एक अध्ययन के हवाले से कहा है कि इस छठे दौर में प्रजातियों के विलुप्त होने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है. कोरोना वायरस से लेकर टिड्डि...