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Showing posts from June 29, 2020

उन्हें बोल कर क्या कहना---

कविता: इशारों से जो समझे उन्हें बोल कर क्या कहना PLEASE SUBSCRIBE BLOG...   SANJAY SANAM Author SOCIAL MEDIA जो बाते दिल की है उन्हें जमाने को क्या कहना जो नजरों में खुमारी रखते है उन्हें मयखाने का क्या कहना हमे मोहब्बत की लत लग गई अब इस आदत का क्या कहना SOCIAL MEDIA लोग चाहते है कि हम आशिकी छोड़ दे पर वो न छोड़े हमे तो बोलो क्या कहना जो नजर खोजती है अपनी राहों में हम न आये तो फिर वफ़ा का क्या कहना बदनाम हुए तो लोग जानने लगे है ऐसे शौहरत के मुकामो पर क्या कहना अब हमारी फितरत पर न आओ तुम तुम्हारे इन बहानों पर क्या कहना खुदा का शुक्र है कि हमारे सर कोई इल्जाम नही है फिर भी है मुजरिम दिल की अदालत में - क्या कहना जो इशारों से समझते है दिल के बयान अब उन्हें बोल कर फिर क्या कहना जिसकी आँखों मे देखी थी अश्कों की बारात अब उसके हालातों पर और क्या कहना प्यार करना तो हमने सिखाया था दुनियां को अब वो उसमे भी करने लगे व्यापार तो क्या कहना जब खुद चलकर आती है बहारें मेरे पास खुद को चमन न कहे तो क्या कहना --- संजय सनम

जो हालातो को न समझे

कविता:जो हालातों को न समझे -तब क्या कहना   SANJAY SANAM Author + फॉलो करें दौलत की दौड़ में जो बेच रहे जमीर तब क्या कहना कुर्सी के लिए जो बन रहे सियासत की जंजीर तब क्या कहना TheBiharnews.com धर्म के नाम पर पाखंडों के ब्रांड से जो हो गए अमीर तब क्या कहना समाज की संस्थाओ में आप देख लीजिए सियासत की नजीर तब क्या कहना जिसके पास है दौलत जो दे सके अनुदानों की रसीद पदवी,सम्मान रहेंगे उसके करीब तब क्या कहना Cartoon dhamaka.blogspot परिधान धर्म के पहन वो पा लेते है सब कुछ लजीज तब क्या कहना दौलत की खनखनाहट पर उसके सारे ऐब छिप जाते वो लगते मर्यादा की लकीर तब क्या कहना जब हो कोई दिल के करीब और न रूठे जैसे रूठ जाता नसीब तब क्या कहना जो हालातो को न समझे चाहे हो वो वजीर तब क्या कहना Ahwanmag.com धर्म की जाजम पर सियासत की कालिख और नही सहना तब क्या कहना नारी देवी का रूप कहते है और शोषण,उत्पीड़न करते है तब क्या कहना स्वच्छता अभियान चलाते है और पान की पीक सड़क पर गिराते है तब क्या कहना लोगों के रुपये देने न पड़े इसके लिए हाथ उठाते है तब क्या कहना गठबंधन सियासत का धर्म मे दिख जाए तब क्या कहना - संजय सन...