कविता: इशारों से जो समझे उन्हें बोल कर क्या कहना PLEASE SUBSCRIBE BLOG... SANJAY SANAM Author SOCIAL MEDIA जो बाते दिल की है उन्हें जमाने को क्या कहना जो नजरों में खुमारी रखते है उन्हें मयखाने का क्या कहना हमे मोहब्बत की लत लग गई अब इस आदत का क्या कहना SOCIAL MEDIA लोग चाहते है कि हम आशिकी छोड़ दे पर वो न छोड़े हमे तो बोलो क्या कहना जो नजर खोजती है अपनी राहों में हम न आये तो फिर वफ़ा का क्या कहना बदनाम हुए तो लोग जानने लगे है ऐसे शौहरत के मुकामो पर क्या कहना अब हमारी फितरत पर न आओ तुम तुम्हारे इन बहानों पर क्या कहना खुदा का शुक्र है कि हमारे सर कोई इल्जाम नही है फिर भी है मुजरिम दिल की अदालत में - क्या कहना जो इशारों से समझते है दिल के बयान अब उन्हें बोल कर फिर क्या कहना जिसकी आँखों मे देखी थी अश्कों की बारात अब उसके हालातों पर और क्या कहना प्यार करना तो हमने सिखाया था दुनियां को अब वो उसमे भी करने लगे व्यापार तो क्या कहना जब खुद चलकर आती है बहारें मेरे पास खुद को चमन न कहे तो क्या कहना --- संजय सनम