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Showing posts from June 7, 2020

मन से बात

...... आत्ममंथन......     आज खुद के नाम पाती लिखने का ख्याल आया, गुजरे हुए न जाने कितने मुकाम तो कभी खामोश से पलों की दास्ताँ  भावनाओं के ज्वार की लहर, आंखों में बीतें पलों का अक्स एक मीठी सी कसक ,मन को भीगों सी गई, आज दिल के भाव श्ब्दों में  उतर चले हैं कविता के रूप उभरने लगे हैं। क्यूँ लिखती हूं नहीं जानती ,हां मैं लिखने लगी। प्यार-पीड़ा ,पहचान-परिचय, स्वयं का आत्ममंथन करने लगी, बीती जो स्वयं पर बस  लिखने लगी। जीवन के सागर में बहते हुए, मन के लहरों के साथ चलती हूं कभी- कभी किनारे पर आकर, करती हूं मंथन अपने मन का तो खुद पर ही हंसती हूं कभी रोकर समय बिताया कभी हंसकर अपनी हालातों के लिए  खुद को ही जिम्मेवार पाया आज खुद के ही नाम पाती लिखने का ख्याल आया, बीते हुए पलों के पन्नों पर, ,स्वयं के हिस्से को तलाशने लगी, जो मिला नहीं गिला नहीं किया, जो मिला नतमस्तक हो स्वीकार किया बीती जो खुद पर आत्ममंथन करना चाहती हूं, अनुभव से जो सीखा, अनुभूतियों ने जो सिखाया, पन्नों पर उकेरना चाहती हूं, इसीलिए आज खुद पर ही पाती लिखने का ख्याल आया।....... सीमा भावसिहका

इश्क़ का पैगाम..

तुम ..ओ मेरे सरताज 🌺 (निर्मला सिवानी की कलम से) चाह कर  भी  भूल नही पाती तुम्हें , क्योंकि मोहब्बत हो  तुम मेरी .. अफसाना  नही , लिखु  और भूल जाऊँ .. जब जब  भी  धड़कता है दिल  महसूस होते हो तुम.. ख़ुशबू नही, महके फिर उड़ जाये.. मेरी नज़रों से  गुज़रे जो इस दफ़ा  रूह बन गये .. जिस्म नही हो , जो दिखे ना दिखे.. सरताज मेरे , इबादतें  पाकीज़ा हो तुम .. मेरी नमाज़ हो  फजर की .. इश्क़ नही , हुआ हुआ  ना हुआ..                             ❤️हुस्नआरा तुम्हारी

सुनो न जरा.....