R,,हमारा सभ्य समाज,और हम--??एक सच कडुवा सा
कैसी मानसिकता हो गई है,,हम सबकी क्या यह सही है,,
मुझें पता है-- आज बहुत कम लोग अपने जमीर से पूछ पाएंगे कि हम गलत है या सही ,,
हम कितने मनोयोग से हर दिन ज्ञान की बाते करते है..
बहुत अच्छी अच्छी बातें करके सबको जताते है..कि
हम कितने ज्ञानवान है,,पढ़ें लिखें है,,
पर आज कल का सच यही है,, कि हमारे मूल्य और सोच कितनी घृणात्मक है,,
जब हम आईना देखते है,, कैसे नजर मिलाते है खुद से,,
जरा सी भी शर्म आती है हमे खुद पर,...शायद नही...
आती शर्म तो जगह जगह यूँही नही बिकते चंद पैसों में....
या फिर जिस्म की चंद पलों की बेशर्म भूख को मिटाने के लिये...नेताओ से लेकर आम आदमी तक इस जिस्मानी भूख का तलबगार क्यों है,,क्यो नही बन जाते बुद्ध,, भगतसिंह, अंबेडकर,,अब्दुल कलाम,,क्या सिर्फ बड़ी बातें ही बड़ा बना देंगी सबको ? मुस्लिम बहुत शादी करते है ...माना ,,,,पर हिंदू कौन से कम है ,, उनके लिये जिस्मानी बाजार बहुत है बस यही फर्क है,, दोनो जातियों में,यह देश है वीर जवानों का ,अलबेलों का मस्तानो का इस देश का यारो अब कुछ नही कहना है, ऐसे देश वासी और यह गली गली शर्मनाक हरकते ....😢
मग़र कब तक ???यह सब
क्यों आने वाली पीढ़ियों से उम्मीद करते हो सब ...कि वो संस्कार वान हो,,,क्यों माता पिता बनते ही सब अच्छा होने की उम्मीद करते हो ,,बोया पेड़ बबूल का आम कहां से पाए,,,,🙏.....क्रमशः @renutyagi
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