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प्रेम किसे कहते है....

प्रेम की भाषा....

किरण अग्रवाल(सिलीगुड़ी)


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कोमल
हृदय में
एक पुष्प
पनपता है
बर्षो से


एक खुशी
सूक्षम्ता
बन
ताउम्र
बिन स्वार्थ के
महकता
रहता

जीवन के
अनसुलझे
क़िस्से के
बीच भी
अतिशय संतोष
की अनुभूति देता

एक पुष्प
मानिंद
अदृश्य

हाँ यही तो
प्रेम है

#किरण अग्रवाल (सिलीगुड़ी)

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