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महिला काव्य मंच सिलीगुड़ी की ऑनलाइन काव्य गोष्ठी।

ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन।


सिलीगुड़ी महिला काव्य मंच ने लॉकडाउन की स्थिति को देखते हुए अपनी सप्तम काव्य गोष्ठी का आयोजन वाट्सएप समूह में दिनांक 27 मार्च को आनलाइन किया जो कि बेहद सफल हुआ। इस काव्य गोष्ठी की खासियत ये रही की दूर दराज में रहनेवाली सदस्याओं ने भी अपनी रचनाऐं मंच तक पहुंचाई।




      दीप प्रज्वलन के साथ ही कार्यक्रम का आग़ाज़ बेहद सुरूचिपूर्ण तरीके से बबिता अग्रवाल जी के संचालन में हुआ।  विशिष्ट अतिथि के रूप में "मन से मंच तक " महिला काव्य मंच की सिलीगुड़ी में नींव रखने वाली (प्रांतीय अध्यक्ष, पश्चिम बंगाल) आरती सिंह के सानिध्य में किया गया | रीता दास की अध्यक्षता में किरण अग्रवाल ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। मंच की संरक्षण अर्चना शर्मा, अध्यक्षा वंदना गुप्ता, महासचिव बबिता कँवल, सचिव रीता दास, सभी की भूमिका सराहनीय रही।
     सब कवयित्रियों ने इस संकट भरे माहौल में एक नयी ऊर्जा भरने का कार्य किया, करीबन 20 कवयित्रियों ने गोष्ठी में अपनी रचनाएँ सुनाई।
        घर बैठे आनलाइन काव्य गोष्ठी के आयोजन की सराहना करते हुए आरती सिंह ने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में कई दिनों बाद काव्य गोष्ठी से खुशी और आत्मिक शांति मिली है |अर्चना शर्मा ने कहा की आज लोग दहशत के साए में जी रहे हैं समय बिताना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में इस तरह के आयोजन से नवसंचार मिला है।
               "कहते है ना  जहाँ रुके कदम वही एक ठहराव आ जाता है और उसमें जो बहाव लाए वहीं कुदरत का नया आगाज़ होता है | कुछ ऐसा ही आयोजन करके बबिता अग्रवाल ने कार्यक्रम की कड़ी जोरे रखी जिस वजह से सप्तम काव्य गोष्ठी सफल हो सकी। उनके कुशल संचालन ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिये किसी को महसूस ही नहीं हो रहा था की ये कार्यक्रम मंच में नहीं हो रहा है। सबकी तारीफ़ और धन्यवाद इस बात की साक्षी है|
        रीता जी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सबको समावेश करते हुवे बेहतरीन अंदाज़ में गोष्ठी के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि उन्हें बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि ये कार्यक्रम मंच में नहीं हो रहा था बल्कि मंच से भी ज्यादा प्रभावशाली इस कार्यक्रम की जितनी प्रसंशा कि जाए कम है।
         करीब तीन घंटे तक चले इस कार्यक्रम के लिए कमला पांडे ने कहा कि
जीवन में कैसी भी विषम परिस्थिति हो जीवन को सकारात्मक रूप से जिया जा सकता है सरल बनाया जा सकता है इस तरह के कार्यक्रम से सीखें।       

                   प्रियंका जायसवाल ने कहा यह मेरा पहला अनुभव था लेकिन सच कहूँ तो बहुत अच्छा लगा । इस काव्य गोष्ठी ने यह साबित कर दिया  कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो मन से मंच तक का सफर चलता ही रहेगा ।

    स्वेता अग्रवाल (जलपाईगुड़ी)
कोरोना के कहर से, कैद हुए घर में सभी,
बोल उठी कवि की कलम, हुई ऐसी काव्य गोष्टी।

भारती बियानी ने कहा-
जगा कर जोश हृदय में ऑनलाइन ही उपस्थित हुए सारे महिला काव्य रचनाकार !
 अपनी रचनाओं के माध्यम से सभी ने प्रस्तुति दी शानदार!
 
अमरावती गुप्ता-     
आज की ऑनलाइन काव्य गोष्टि हमने कल्पना भी नही की थी की इस तरह की होगी, हमें लगा था हम सब अपनी अपनी रचना की ऑडियो क्लिपिंग भेज देंगे, लेकिन बबिता जी को इसका श्रेय जाता हैं कि बस मजा आ गया, हम एक पल के लिए भी नही हटे

रिंकी गुप्ता ने कहा की मानव के लिए राहें निकल आती है बशर्ते ज़ज्बा हो।
आशा बंसल ने कहा कि कैसे समय बित गया पता भी नहीं चला।
निशा गुप्ता ने कहा कि सोचा भी नहीं था घर बैठे बैठे इस तरह का आयोजन हो सकता है।
 नेपाल से, धरान से, जलपाईगुड़ी से, कलकत्ता से अलग अलग स्थानों से कवियित्रियों ने कार्यक्रम में भाग लिया तीन घंटे का यह कार्यक्रम बहुत ही रोमांचक रहा | सभी ने अंत तक अपनी भागीदारी निभाई।प्रत्येक कवयित्रियों ने अपने काव्य पाठ की रिकॉर्डिंग क्लिप समूह में भेजकर काव्य गोष्ठी को एक अनूठी पहचान दी।

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