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गाय की महत्ता को समझिए...

*जो मात्र विज्ञान और स्वार्थ (धन) की कसौटी पर गाय को कसते रहेंगे...*
*वो गाय के नाश के षड़यंत्र में फंसते रहेंगे...*

 साभार:प्रीतिका मोजूमदार

सन्तान धर्म की मूल आधार शक्ति गौमाता है जो वैदिक भारत से लेकर श्री राम कृष्ण भगवान जी द्वारा सदैव धर्म से जुड़ी रही, पूज्य रही, प्रतिष्ठित रही, माँ की संज्ञा से जगविदित रही जो मूल कारण है जिसने गौमाता के आशीष को आज तक वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाया है। 


गाय को कभी भूलवश भी पशु समझना तो दूर कहना भी नही चाहिए, गाय हमारी माँ है और यही भाव सबसे महत्वपूर्ण है जो ऋषि मुनियों, साधु-संतों, देवो, भगवानों द्वारा   गाया गया है, इसलिये इसके सामने सब अन्य कारण गौरक्षा के व्यर्थ, खोखले है जिसमे विज्ञान आधारित उपयोगिता, और अर्थव्यवस्था हेतु गौधन जुड़ा है क्योंकि पहला भाव ही माँ बेटे के भाव का होता है उसके उपयोग और स्वार्थ का नही।

जबकि यह बात बिल्कुल उपयुक्त है और होना ही चाहिये कि गौमाता हमारी अर्थव्यवस्था को ऋण मुक्त बनाने, स्वास्थ्य को परिपूर्ण करने तथा कृषि को परिष्कृत कर भारत को विश्वगुरु बना सकती है क्योंकि वह कामधेनु है लेकिन मूल दृष्टि भाव माँ का होना चाहिये, फैक्ट्री का नही, भारतीयता का होना चाहिए, इंडियन का नही।

इसलिए गौरक्षा का मूल ही है गौ को वही प्रतिष्ठा देना तो जगतमाता की है जिसके लिये #गौमाता_राष्ट्रमाता घोषित करके ही गोवंश हत्या मुक्त भारत बनेगा। इसलिए #गौहत्या_बंद_करो_

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