🌺आरज़ू
तुम्हे पाने की आरजू तो नहीं,
फिर भी खुद में ..
तुम्हे खोजती रहती हूँ दिन रात,
वैसे ही ..
जैसे कस्तूरी मृग कस्तूर को खोजता है !!
तुम्हे याद रखने की ..
आदत तो नहीं,
फिर भी हर पल
तुम्हारे ख्यालों में ..
खोयी रहती हुँ ,
जैसे कि ..
एक कवि अपने
रचनाओं में !!
तुमसे मिलने की ,
चाहत तो नहीं..
फिर भी नज़रें तुम्हे,
हमेशा
खोजती रहती हैं ..बिल्कुल वैसे
हा वैसे ही
जैसे चातक पक्षी
टकटक
चाँद को देखता ही रहता है..!!
ओ मेरे सरताज..🌷
❤
:-निर्मला सिवानी
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