तुम ..ओ मेरे सरताज 🌺
(निर्मला सिवानी की कलम से)
चाह कर
भी
भूल नही पाती तुम्हें ,
क्योंकि मोहब्बत हो
तुम मेरी ..
अफसाना नही ,
लिखु
और भूल जाऊँ ..
जब जब
भी
धड़कता है दिल
महसूस होते हो तुम..
ख़ुशबू नही,
महके फिर उड़ जाये..
मेरी नज़रों से
गुज़रे जो इस दफ़ा
रूह बन गये ..
जिस्म नही हो ,
जो दिखे
ना दिखे..
सरताज मेरे ,
इबादतें
पाकीज़ा हो तुम ..
मेरी नमाज़ हो
फजर की ..
इश्क़ नही ,
हुआ हुआ
ना हुआ..
❤️हुस्नआरा तुम्हारी
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