झूठे कहीं के
ऐ सपनों ,
रोज़ रोज़ मेरी नींद में
आया ना करो,
मिलने आना है तो आओ,
पर सताया ना करो,
किस घड़ी मैं व्यस्त हूं,
तुझको कहां खबर,
बेसब्रे से हो जाते हो,
मुझ पे करने असर,
थोड़ा सा मुझे जीने दो,
थोड़ा सा तुम आओ,
थोड़ी सी रहमत बरसा,
थोड़ा बाहर जाओ,
बीती बातें कानों में,
फुसफुसाया ना करो,
अगर बतानी हो यादें,
मन भटकाया ना करो,
मेरी मीठी यादों के,
अभी खोल दरीचे बैठी,
खाली छत घूर रही,
तकिया भींचे लेटी,
चैन से मुझको रहने दे,
खुद से कर लूं बात,
तेरी झूठी दिलासा से,
जाने कब मिले निजात,
तुम सजीले और रंगीले,
अकेले डराया ना करो,
इतनी प्यारी लगूं तुम्हें,
तो पराया ना करो,
ऐ सपनों,
यूं बेखबर बन,
आया ना करो,
आना है तो आओ,
टाइम बिताया ना करो।
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