जीवन धुरी 🌺
धीमें धीमे
नर्म अहसासों में..
वक़्त ने थोड़ी करवटें ली,
आसमानी आँखों में मेरी
बरसों बाद
उतरे प्यार पुनः
धीरे -धीरे
तुम्हारे लिये..
सराहती रही
कामयाबी को तुम्हारी ,
क़दम दर क़दम ..
हताश हुई मैं जब,
सम्भालते रहे तुम हरदम..
कमाल हुनर है तुममें
मुझे
यूँ खिलखिला देने का
बेला सी महक दर महक
साँसें मेरी..
शामिल हो मुझमें यूँ जैसे
सोच भी तुम ओर नज़रिया भी तुम
जताऊँ कैसे आभार तुम्हारा
शब्द दर शब्द..
पर ये ज़रूर है तुम हो तो मैं हूँ
क्योंकि तुम जीवन
धुरी हो मेरी
ओ मेरे सरताज..
:निर्मला सिवानी
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