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जो हालातो को न समझे

कविता:जो हालातों को न समझे -तब क्या कहना

दौलत

की दौड़ में

जो बेच रहे जमीर

तब क्या कहना

कुर्सी के लिए

जो बन रहे

सियासत की जंजीर

तब क्या कहना

TheBiharnews.com


धर्म के नाम पर

पाखंडों के ब्रांड से

जो हो गए अमीर

तब क्या कहना

समाज की संस्थाओ में

आप देख लीजिए

सियासत की नजीर

तब क्या कहना

जिसके पास है दौलत

जो दे सके अनुदानों की रसीद

पदवी,सम्मान रहेंगे उसके करीब

तब क्या कहना


Cartoon dhamaka.blogspot

परिधान धर्म के पहन

वो पा लेते है

सब कुछ लजीज

तब क्या कहना

दौलत की खनखनाहट पर

उसके सारे ऐब छिप जाते

वो लगते मर्यादा की लकीर

तब क्या कहना

जब हो कोई दिल के करीब

और न रूठे जैसे

रूठ जाता नसीब

तब क्या कहना

जो हालातो को

न समझे

चाहे हो वो वजीर

तब क्या कहना

Ahwanmag.com


धर्म की जाजम पर

सियासत की कालिख

और नही सहना

तब क्या कहना

नारी देवी का रूप कहते है

और

शोषण,उत्पीड़न करते है

तब क्या कहना

स्वच्छता अभियान चलाते है

और पान की पीक

सड़क पर गिराते है

तब क्या कहना

लोगों के रुपये

देने न पड़े

इसके लिए हाथ उठाते है

तब क्या कहना

गठबंधन सियासत का

धर्म मे

दिख जाए

तब क्या कहना

- संजय सनम

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