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बेटे के लिए एक बाप की प्रेरक कहानी

प्रेरक कहानी: बाप का बलिदान- बेटे की नोकरी के लिए अपनी जान दी

आसान कहाँ है सरकारी नोकरी मिलना--कीमत क्या है योग्यता की--आरक्षण की योग्यता उसके अपने कोटे के वजन से भारी है पर रमेश की किस्मत खुल गई--पिता की अचानक मौत और उसको पिता के स्थान पर नोकरी मिल गई अन्यथा रमेश भी हमारी तरह चप्पलें फाड़ रहा होता पर उसकी जिंदगी उसके पिता ने आसान कर दी-- नोकरी में रहते स्वर्गवासी हो गए पर बेटे के जीवन को सुखमय कर गए-हमको तो न जाने और कितना चलना है-कितने इम्तिहान देने है --नही मालूम।

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नोकरी की तलाश में तंग हो चुके-सरकारी परीक्षाओं पर परीक्षाएं देकर भी कोई परिणाम तक न पहुंच पाने का दर्द विजय की जुबान से बोल रहा था तथा बालकनी में उस वक्त किसी कार्य से आये उसके पिता ने यह सुन लिया था उन्हें मालूम था बेटे की कड़ी मेहनत पर परिणाम के वक्त आरक्षण के कोटे की दीवार--रमेश के पिता की अचानक मौत ने रमेश की जिंदगी आसान कर दी-- यह बात उनके दिमाग मे घूमने लगी। बाप बेटे के दर्द और उसके संघर्ष को समझ रहा था-अपने बेटे को अब और हारते नही देखना चाहता था-अगले वर्ष तो वो नोकरी से सेवा अवकाश पाने वाले थे इसलिए फिर समय भी नही था।

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कमरे में आकर वो सोचने लगे कि कैसे मरा जाए ताकि वो प्राकृतिक मौत लगे--भगवान से जो हमेशा अपनी लंबी जिंदगी चाहते थे आज अपने बेटे को सरकारी नोकरी के लिए अपनी मौत चाहने लगे।दिमाग भारी हो गया था-मरने के लिए तो नींद की गोलियां भी खाई जा सकती थी पर कही राज खुल जाए तब फिर बेटे की नोकरी को खतरा हो जाएगा--इसलिए कार्यालय जाते समय सड़क दुर्घटना से मरने का प्लान मन ही मन बन गया था।

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पत्नी,बेटे,बेटी सबका चेहरा घूम रहा था पर बाप ने बेटे की हताशा को दूर करने का निर्णय कर लिया था।डिनर के बाद अपने परिवार के साथ बैठ कर बातों ही बातों में अपनी पालिसी व आवश्यक कागजात की जानकारी अपनी पत्नी व बेटी के सामने अपने बेटे को अच्छी तरह समझाई पर किसी को यह शक नही होने दिया कि आज वे ऐसा अचानक क्यो बता रहे है।रात को अतिरिक्त पूजा पाठ की-मन को कड़ा रखने के लिए पत्नी से दूर रहे- नींद रात भर नही आई--

कल की परीक्षा जीवन की सबसे कठिन परीक्षा थी उन्हें मरने का डर नही था पर मौत आत्महत्या न लगे यह शक जरूर था।सुबह सबको जी भर देखा--प्यार से बोल रहे थे- बेटे बेटी पर अतिरिक्त स्नेह भर भर आ रहा था।पत्नी से नजर चुरा रहे थे मन ही मन माफी भी मांग रहे थे--दप्तर की तरफ जाने से पहले घर और सबको बड़ी हसरत से देखा और बाइक स्टार्ट करने लगे अब परीक्षा असली थी-

-एक बाप अपने बेटे के जीवन को नोकरी का स्थायित्व देने के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने आगे बढ़ रहा था -हाई वे की सड़क पर आवागमन तेज था -अब बाइक तेज गति से सामने आते ट्रक को लक्ष्य कर दौड़ रही थी थोड़ी ही देर में बाइक ट्रक की चपेट में आ गई थी--और हलचल मच गई-सड़क का वो हिस्सा खून से लाल --एक बाइक ट्रक से जा भिड़ी की ब्रेकिंग न्यूज़ बन गई थी सब कोई दुर्घटना की बात कर रहा था यह किसी को खबर नही थी कि एक बाप अपनी नोकरी बेटे को दिलवाने के असमय मौत के दरवाजे पर खुद आया था--आरक्षण ने लील ली थी एक जान पर इस पर किसी का नही गया ध्यान--यह घटना महज एक सड़क दुर्घटना बनी और उस आंकड़े में एक ओर संख्या बढ़ गई थी.

प्रिय पाठक

अगर आपको कहानी प्रेरक,कड़वा सच और भावना प्रधान लगी हो तो इसे लाइक,शेयर व मुझे फॉलो करना न भूले- कमेंट बॉक्स में आपके विचार आमंत्रित है।

-संजय सनम


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