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प्रेम

 - प्रेम का संदेश 
By- Dr Mamta Bansal 



आज तक रेत पे पैरों के निशां, रहे हैं किसके,
प्रेम वह सागर है, जो दिलों पे छाप छोड़ जाए।

अल्लाह अल्लाह सब कहे सीढ़ी चढ़े ना कोई,
जो सीढ़ी चढ़े प्रेम की, आपहु अल्ला होए,

बलिदान की कहानी कहता है क्रॉस, प्रेम का संदेश फैलाए,
मर कर भी जिंदा हुए यीशु, प्रेम यह चमत्कार दिखलाए।

कहो कबीर हिंदू या मुस्लिम, जलाएं या दफनाए ,
जात धर्म नहीं प्रेम की, बस मरे फूल बन जाए।

प्रेम का प्याला पीकर मीरा, विष भी अमृत कर जाए,
हर सांस में कृष्ण नाम, उनकी मूरत में समा जाए।

खून पसीना मिला खेतों में, जीवन जो लहलहाए,
जिसको प्रेम इस माटी से, वह किसान कहलाए।

कतरा कतरा बहा दे, देश प्रेम में जो मिट जाए,
जो मां माने इस देश को, वह जवान कहलाए।

प्रेम बनाए रिश्ते नाते, राखी के धागे जब बंध जाएं,
लक्ष्मीबाई की राखी में बंधे, नवाब अली,
सर पर कफन बांध चले आए।

प्रेम की दो प्यारी बेटियां, खुशी और शांति कहलाएं,
प्रेम ही सबका मजहब हो तो, ईश्वर बेटियों में ही मिल जाए।

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