ऐ चांद तेरी वफ़ा सवाली है
ऐ चांद
Denik bhaskar
तुझे हमारी दीवानगी का क्या पता नही
तेरे लिए लिखे गीतों का गुंजार क्या तुमने सुना नही
क्या तू नही जानता
महबूब
तेरे नाम की उपमा
अलंकार
अपनी माशूका को देते है
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क्या तू नही जानता
कि यहां माँ
अपने लाडले को
चांद का टुकड़ा कहती है
क्या तू नही जानता
कि सुहागिन
करवा चौथ का व्रत
तेरा मुख देख कर
तोड़ती है
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क्या तुझे नही पता
मोहब्बत की ईद
तुझे देख कर
मनाई जाती है
तेरा हमारा रिश्ता तो बहुत पुराना है
परंपराओं के धागों से बंधा है
श्रद्धा की डोर से जुड़ा है
प्रेम के अलंकारों से सजा है
आज तुम्हारी वफ़ा सवाली थी
हम इतने करीब
चल कर आ गए तुम्हारे पास
अरे कुछ तो
तुम्हारी भी जिम्मेदारी थी।
अब ये नादानी मत करना
अधूरी कहानी मत करना
हम जल्द फिर आ रहे है
अब प्रीत निभाने की तुम्हारी बारी है



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