दोस्ती- दोस्त के साथ खड़ी रहती है
मित्रता--
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जीवन का आधार होती है
दिल का श्रृंगार होती है
जब कदम लड़खड़ाते है
सहारे की पक्की दीवार होती है
लबों की मुस्कान होती है
नजरों की चाह होती है
जेठ सी तपती दुपहरी में
मोहब्बत की छांव होती है
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कभी मदिरा कभी जाम होती है
साकी के हाथों का शबाब होती है
इसका नशा कभी उतरता नही
यह मधुशाला का अहसास होती है
मन का इजहार होती है
चाहतों की नाव होती है
इसके समंदर में उतर जाओ
जिंदगी जन्नत सा मुकाम होती है
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कभी खूंटी सी तनी रहती है
अक्सर फलों सी लदी रहती है
जब कोई साथ नही होता
यह दोस्त के साथ खड़ी रहती है।
दोस्ती के इस अनमोल रिश्ते पर इश्क के इत्र को औऱ लगाइए--रूठे हुए दोस्तों को आज आवाज देकर बुलाइये--शायद किसी को आज आपकीं आवाज का इंतजार हो सकता है उसके इंतजार को करार के मुकाम तक पहुंचाइये।



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