फ्रेंडशिप डे स्पेशल :करार ,बेकरार ,इंतजार का संगम है दोस्ती
दोस्ती---एक ऐसा शब्द जो उदासियों के मंजर में भी सावन की फुहार सा लगता है---तन्हाइयों के अंधकार में जो अपनत्व का उजास लगता है।दोस्ती-- एक दूजे का विश्वास--एक दूजे का अहसास, एक दूजे पर अधिकार लगता है--यहां दिखावटी औपचारिकतायें नहीं होती-यहां भरोसे की जमीन पर ईमारत खड़ी होती है जो अक्सर खून के रिश्तों से भी बड़ी होती है।
दोस्ती--यह ईश्वर प्रदत्त उपहार होती है--करोड़ों की भीड़ में कुछ चेहरे कब जिंदगी में आ कर इस तरह सांसों में बस जाते है कि बिन उनके जिंदगी भी बेकार लगती है। जिनसे दूर दूर तक का कोई रिश्ता नही होता- जो सैंकड़ो हजारों मील दूर होते है पर कभी शब्दों की जुबान से मिलते है - फिर अहसास की आवाज को सुनते है फिर दिल मे ही कही ठहर जाते है--
-कुछ लोग फिर हकीकत में मिल जाते है तब उनको अपने सामने देखने,जानने,मानने की वो तारीख जिंदगी की एक बहुमूल्य निधि बन जाती है।पर कुछ लोग कई सालों तक नहीं मिल पाते पर फिर भी धड़कने हर दिन मिलती है।यहां मोहब्बत हर दिन एक नया सा गीत लिखती है और यह इंतजार बेकरारी की हद तक जब जाता है तब दोस्ती के अंदर का पन्ना भी समझ मे आता है।
दोस्ती की यह किताब सुकून के रंगों से भरी है --भरोसे की जिल्द से बंधी है और प्यार की डोरी से बंधी है--यह जीवन का बेशकीमती ग्रन्थ है जिसमे प्यार के शब्दों से दुनियां के तमाम मजहबो की किताबें भी कही न कही मिली होती है।
दोस्ती में तकरार भी होती है--अनबन भी होती है पर यह न तो टूटती है न बिखरती है-- क्योकि दिल की गहराई से जुड़ी होती है इसलिए हर तकरार के बाद यह खुद संवरती है।आइये अपनी अपनी जिंदगी के उन खूबसूरत पन्नों को प्यार से सलाम कर ले औऱ जिंदगी के लम्हें उन प्यारे दोस्तों के नाम कर दे।



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