महाराजा अग्रसेन जी की लक्ष्मी सिद्धि का लाभ अग्रवंशी को समृद्धि दे रहा है।
एक तरफ आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को देवी भक्ति के नवरात्रे औऱ इसी दिन अग्रवंश के जनक महाराजा अग्रसेन जी की जन्म जयंति।
एक ऐसे महापुरुष जो रघुवंश के त्रेतायुग के श्री राम के पुत्र कुश की 35 वी पीढ़ी से आते है तथा अपने शौर्य,पराक्रम, नीति नियम,सदाचार, प्रजापालक राजा के साथ सन्यासी वृति में रम कर माँ लक्ष्मी की सिद्धि पाकर अग्रवंश कुल को समृद्धि से ओतप्रोत कर देते है।
महाराजा अग्रसेन जी श्री राम जी के पुत्र कुश की 34 वी पीढ़ी के महाराजा श्री बल्लभ सेन जी के सुपुत्र थे।इनकी जन्म कुंडली को देख कर राज ज्योतिषियों ने पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि यह बालक परम प्रतापी प्रजा पालक बनेगा और इनके नाम से ही इनका कुल जाना जाएगा और कालांतर में यह भविष्यवाणी सत्य हो जाती है।
इनके पिता महाराजा बल्लभ सेन जी महाभारत के युद्ध मे पांडवों की तरफ से युद्ध करते हुए जब वीर गति को प्राप्त कर जाते है तब शोकाकुल युवराज अग्रसेन जी को भगवान श्री कृष्ण दिव्य ज्ञान देकर पिता का राज काज सम्हालने का आदेश देते है।
विवाह योग्य होने पर महाराजा अग्रसेन जी का विवाह नागराज की अतिसुन्दरी पुत्री माघवी से सम्पन्न होता है।महाराजा अग्रसेन जी ने अग्रोहा धाम बसाया तथा अनावृष्टि के कुदरती प्रकोप का मुकाबिला करते हुए नदियों के पानी को नहर के रूप में नगर तक ले कर आये।
अपने शासन काल मे निर्धनता की वजह से लोगो को अपराधी बनते देख एक रुपया एक ईंट सहायता स्वरूप घोषणा की जो समृद्ध व्यक्ति इस तरह की सहायता गरीब लोगों को देते थे।
निकट सम्बन्ध में विवाह प्रथा को रोकने के लिए उन्होंने अपने 18 पुत्रों के नाम से 18 गोत्रों की स्थापना करते हुए अपने पुत्रों को एक एक गोत्र का मुखिया बनाया तथा अपने अपने गोत्र में विवाह निषेध कर दिया।
यज्ञ के पश्चात पशु बलि की व्यवस्था को निषेध कर अहिंसा व शाकाहार का संकल्प लेने वाले महाराजा अग्रसेन जी जीवन के आखिरी पड़ाव पर सन्यासी की तरह बन कर महालक्ष्मी की साधना से अभीष्ट सिद्धि व अग्रवाल वंश की समृद्धि के लिए वरदान प्राप्त किया।
महाराजा अग्रसेन जी का व्यक्तित्व व कृतित्व पराक्रमी राजा के साथ संत पुरुष की दिव्यता से सजा था।शायद तभी भगवान कृष्ण का दिव्य ज्ञान व महालक्ष्मी के वरदान के अधिकारी बने।
अग्रवाल वंश की समृद्धि के पीछे महाराजा अग्रसेन जी की महालक्ष्मी के प्रति साधना,आराधना जुड़ी हुई है।यह कहना अनुचित नही होगा कि जिस तरह जैनियों के लिए भगवान महावीर है ठीक उसी तरह अग्रवाल वंश के लिए महाराजा अग्रसेन जी है।
दिव्य महापुरुष की जन्म जयंति पर शत शत नमन।
तथ्यात्मक विषय सामग्री- दैनिक पत्र से साभार
आलेख: संजय सनम( PLEASE LIKE,SHARE,FOLLOW ME..)


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