जिसके लिए शब्दों को संवरना पड़ता है
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कुदरत की अता होती है
या फिर खता होती है
ये प्रेमिका अदभुत बला होती है
क्या इनकी अदा होती है
न मालूम कितनी वफ़ा होती है
जाने कब खफा होती है
कब ये रफा होती है
ये प्रेमिका
FREEPIK..
इश्क का नशा होती है
कभी दिल का मर्ज होती
कभी दिल की दवा होती है
मोहब्बत की सजा होती है
हसीनों के हुस्न को
कहना- लिखना पड़ता है
कलम को संवरना पड़ता है
सज धज कर फिर उतरना पड़ता है
कभी इतरना
कभी बिखरना
कभी मिलना
कभी बिछुड़ना
प्रेम की भाषा मे
कभी बहकना
कभी ठहरना पड़ता है
प्रेम
प्रेमिका की नजरों से
मोहब्बत की
खुशबू लेकर
चढ़ता है
अक्सर
इसका असर
ता उम्र भी रहता है
कभी बेवफाई
इसे तोड़ देती है
और कभी
कोई इसे
फिर जोड़ देती है
यह होता हुआ ही
अच्छा लगता है
बिन प्रेम
जीवन भी जंगल लगता है।


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