काश्मीर भारत का अब अभिन्न अंग बना है
एक राष्ट्र में
दो झंडे
दो संविधान
जाने कैसे चलते थे!
हम मूर्ख
तब भी
काश्मीर को
भारत का अंग कहते थे।
देश विरोधी
गद्दारों के
भारत विरोधी नारे
खुले आम जब लगते थे
उनकी झूठी सुरक्षा में
हमारे जांबाज रहते थे
उन भेड़ियों के आगे पीछे
शेरों को चलना पड़ता था
देश के भाल को
तब झुकना पड़ता था
आतंकियों से इनकी यारी
देश को भारी पड़ती थी
पर इनकी आवभगत
दिल्ली की दस जनपथ करती थी
देश के मस्तिष्क पर
अधिकार इनका चलता था
देश का धन
इन पर लगता था
जो हमारे टुकड़ो पर पलते थे
वे हमसे नमक हरामी करते थे
दुश्मन को बचाने की
जो घेराबंदी करते थे
आतंकियों के लिए
जो पत्थर बाजी करते थे
इनके आका
गद्दारी की दलाली करते थे।
धारा 370 का संरक्षण इनको मिलता था
काश्मीर की सड़कों पर दुश्मन झंडा दिखता था
कश्मीर की भूमि पर भारत का अधिकार नही था
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर का भी कोई सम्मान नही था
फिर भी हम कश्मीर को भारत का अंग कहते थे!
यह सियासत, कुर्सी की कमजोरी थी
उस सत्ता के वोट बैंक की मजबूरी थी
गद्दारों के गठबंधन से दिल्ली चलती थी
लोकतंत्र के मंदिर की दीवारें रोती थी।
संविधान की किताब पर धारा 370 भारी थी
इसको हटाने की पहले भी हुई तैयारी थी
पर सत्ता के लोभियों का जमघट भारी था
देश के सम्मान पर वोट बैंक हावी था।
नेहरू अपने रुतबे से जो मन मानी कर गए
कुछ रिश्तों को निभाने की नादानी कर गए
शास्त्री ने की कोशिश -मगर लोग कारस्तानी कर गए
काश्मीर में गुलामी की अजब कहानी कर गए।
अब घनघोर अमावस छंट गई- अब भोर उजाला आया है
गौरव गाथा के पन्नों से 370 का कलंक हटाया है
मोदी- शाह की यह जोड़ी- अभ्युदय का इतिहास बनी है
कश्मीर की आजादी का यह गौरवशाली पाठ बनी है।
अब कश्मीर भारत का
गर्व से हम कह सकते है
काश्मीर में अब
हम बेखोफ रह सकते है
अब तिरंगा भारत का
मुकुट पर तन कर खड़ा है
अब कश्मीर
भारत का अभिन्न अंग बना है।
श्यामाप्रसाद के बलिदान का
अटल के ख्वाब का
अब हिसाब पूरा हुआ है
मोदी- शाह की इस जोड़ी से
आजादी का अहसास पूरा हुआ है।
दो शेरों ने संसद में जब हुंकार भरी है
तिरंगे ने तब कश्मीर की उड़ान भरी है
देश मे आजादी का तब गुलाल उड़ा है
सियासत में भी देश प्रेम का भान जगा है।
देश प्रेम की आंधी ने
सियासत के नए समीकरण बनाये है
विपक्ष के खेमे से भी
कुछ लोग साथ आये है
आज जो साथ खड़े
- समय उनका अभिनंदन करता है
मोदी शाह की इस जोड़ी को
ह्रदय से वंदन करता है।
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