तमगों की दुनिया,
कुछ पाने की ख्वाहिश,
कुछ दिखाने की आदत,
कुछ ना मिले तो,
बुदबुदाने की जहमत,
शिकवों की थाली,
जहन में कुदाली,
ये छुपी कोई गुपचुप सी पहेली,
नादानी में अठखेली,
बाबा ने भांपा,
दिल में खटकता कांटा,
तीर निशाने पे साधा,
बिना पहुंचाएं बाधा,
चरणधूलि शीश नवाया,
क्या दोष प्रसाद उसने पाया ,
पाने गई , लुटा के आई,
प्रिय से थी तेरी बेवफ़ाई,
क्यूं मारती बाहर में फाके,
कुछ तो अपने दिल में झांकें।
:प्रेम सिंगी(दिल्ली)
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