हे राधे तेरा जो साथ कृष्ण को
सुकून देता है
तेरी चन्द बातें जो कृष्ण को
अनमोल लगती है
तेरी वो मंद मुस्कान जो कृष्ण को जीवन देती है
तेरे चेहरे की जगमग आभा से जो चहुँओर रोशनी बिखर जाती है
वो समर्पण आँखों में प्रेम और होंठों में मिठास लिये जब सब कुछ
सादगी से तरंगित हो उठता है
तब बजती है कृष्ण मुरलियाँ
और होता है
प्रकृति पुरूष का मिलन..
:निर्मला सेवानी(गुड़गांव)
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