ज्ञान, बुद्धि,विवेक,कला,साहित्य,शब्द संस्कृति की अधिष्ठात्री देवी मां शारदे के श्री चरणों में कोटि कोटि वंदन।
ज्ञान का दीप जले
अज्ञान का अन्धकार मिटे
प्रेम का प्रकाश हो
सुख,समृद्धि,खुशहाली से हरा भरा
बासंती अहसास हो।
मैया
हमारे मस्तक पर आपका हाथ हो
आपके आशीष की हरी भरी छांव हो।
जय जय जय वंदन है
कोटि कोटि अभिनंदन है
सभी स्नेहिल मित्रों को बसन्त पंचमी के इस महोत्सव पर हृदय से शुभ मंगल कामनाएं।
संजय सनम
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