तुम्हें आजकल कम प्यार करने वाली
तुम अक़्सर कहते हो,
"तुम आजकल बदल गईं हो।
अब पहले की तरह मुझसे प्यार नहीं करती”
मैं तब सोचने लगती हूं,
मैं तुमसे प्रेम तब करती थी या
अब करती हूं !
उलझ गए न
चलो सुलझा देती हूं
पहले वेलेंटाइन, नया साल, वर्षगांठ, दिवाली,
मिलन दिन, स्पर्श दिन, चुम्बन दिन, जन्मदिन
आदि आदि पर
तुम्हें ढेरों उपहार और सरप्राइज देती थी,
सोशल मिडिया पर रोमांटिक तस्वीरों के
स्टेटस लगाती थी।
क्यों, क्योंकि सब ऐसा करते हैं।
अब मुझे यह सब करना याद नहीं रहता
अब मेरी वार्डरोब तुम्हारी
पसंद के कपड़ों से भरी है,
और मेरा पसंदीदा रंग
कब पिंक से नीला हो गया
मुझे पता ही नहीं चला।
कल दीदी ने फोन पर याद दिलाया कि मैं
बचपन में माल पुए बहुत खाती थी,
मैं यह कहकर मुस्करा दी,
वो सब बचपन की बातें थी,
अब मैं बड़ी हो गई हूं।
क्योंकि तुम मालपुए पसंद नहीं करते।
दीदी ने ही याद दिलाया था,
जिस दिन घर में खीर बनती थी
मैं आसमान सिर पर उठा लेती थी
पर अब महीने में चार बार बनाती हूं
क्योंकि तुम्हें बहुत पसंद है।
तुम्हारी खूबसूरत आँखों पर कई गजलें
लिखी थी मैंने जिन्हें तुमने शायद ठीक से
पढ़ी भी नहीं मगर दोस्तों को गर्व के साथ बताते थे कि
मैं तुम्हारे प्यार में शायर बन गईं,
सच कहते हो तुम
अब तुम्हारी आंखें शायरी नहीं लिखवाती
अब उनमें डुबती उतरती चिंताएं
घर को खिफायत से चलाना सिखाती है।
और तुम्हें रात दिन लेपटॉप में आँख गढ़ाए देख
मेरी आँखें भर आती है।
पहले तुमसे बहुत झगड़ती थी,
रूठती थी, रोती थी, बात नहीं करती थी
अब.......अब...... तुम्हें देखकर
तुम्हारे द्वंद्व को पहचान जाती हूं,
तुम्हें छू कर तुम्हारा मिजाज भांप लेती हूं।
फिर भी जब तुम उलाहना देते हो
कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती
तो हँस पड़ती हूं
नजरअंदाज कर देती हूं
मगर कभी कभी सोचती हूं
अब वाले में पहले वाला मिला दूं
मगर फिर सोचती हूं,
मिलावटी प्रेम रिश्तों को
मिलावटी बना देगा
और फिर तुम्हारी हजार उलाहने सुनकर भी मैं,
तुम्हें आजकल कम प्यार करने वाली ही,
बनकर रह जाती हूं।
बबिता कोमल Babita Komal #babita_komal
Comments
Post a Comment