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#कविता...अच्छा लगता है..

#अच्छा लगता है 

तलाश नही सुकून की,
अब मुझे..
तेरी यादों में 
रातों को 
जागना अच्छा लगता है... 
ढूँढती हुं तुझको 
किस्मत की लकीरों में ,
और फिर
दुआओं में तुझको 
माँगते रहना अच्छा लगता है..

जानती हूँ हक नहीं 
तुझ पर मेरा,
फिर भी तेरी 
फिक्र करना अच्छा लगता है..

जमाने को एहसास हैं 
मेरे दर्द का,
तुझे सोच
दर्द में भी 
मुस्कुराना अच्छा लगता है..

सोचती हूँ 
कब गुज़रेगी साथ साथ 
जिन्दगी हमारी,
फिर भी
उम्मीदों को सजाना
अच्छा लगता है...

ये ख़बर है मुझे 
कि तुम मेरे हो,
फिर भी बार बार तुमसे 
अपना कहना 
अच्छा लगता है..

दिल कहा मानता है 
मेरा कहा
इसे भी आपके लिए ही 
धड़कना अच्छा लगता है ..
मेरे सरताज !!

          :निर्मला सिवानी 

Comments

  1. लाजवाब अहसास...दिल को अपनेपन से तर करने वाले..
    बहुत खूब निर्मला जी...

    ReplyDelete

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