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बचपन की यादें..

याद आता है मेरे बचपन का शहर ...

   

  मेरे बचपन का शहर बसता है छोटी बडी पतली चौडी गलियो मे ,गंगा और गंगा किनारे बने हुये सुन्दर मनोरम घाट ,गंगा के उस पार बहुत विशाल खुला रेतीला मैदान | संगीत  व कला का उपासक , संस्कृती  का संवाहक ,  कजरी ,ठुमरी और बासुरी की धुन ... शिक्षा की राजधानी , माँ सरस्वती विराजती ,जीवन  को ज़िवित रखता  मृत्यूपरांत जीवनदाता , जहा की सुबह  होती सबसे अलबेली और रातो को भी जागता है हमारा शहर | सिर्फ विश्व के प्राचीनतम शहर न हो कर एक खुबसूरत जज्बात भी है|




हमारे शहर की गलियो की रौनक ,स्वादिष्ट खाने की खुशबू , मन्दिरो मे घन्टो की टनटन के साथ रस घोलते हुए आरती के सुमधुर बोल और साथ ही बिना किसी भेदभाव बिना , मजहब के दीवारो को गिराते हुये मस्जिदो से आती हुई अजान की आवाज़ गुजती है कानो मे और माँ  के हथेलियो के स्पर्श जैसे लगती ,हौले  से कहती अब  उठो भी जाओ सुबह हो गयी|
मेरा शहर सिर्फ शहर नही , जीने का सलीका है | मृत्योपरान्त  मोक्ष का मार्ग कहलाता है | जज्बातो का अम्बार है , जो भी आया यहाँ यही का होके रह गया | हाँ इसे कोई अब तक बदल ना पाया क्योकि इसका मिजाज कोई समझ ना पाया |
         अब आप अनुमान लगाये मेरे खुबसूरत से शहर का नाम....हॉ सही पहचाना आपने वो शहर है बनारस ,जिन्दा शहर बनारस अपने ही रंग ने ढला निराला व मस्त बाबा विश्वनाथ की नगरी।
      मदन मोहन मालवीय जी ,लाल बहादुर शास्त्री जी ,पं कमला पति त्रिपाठी जी की कर्मभूमि ये नगरी आज बदलते वक्त भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का संसदीय क्षेत्र है । 2014 से मोदी जी के नेतृत्व मे बनारस कन्धे से कन्धा मिला कर विकास की गति मे निरन्तर गतिशील है । बदल गया है और बहुत कुछ बदल रहा है बनारस मे भी.....बस नही बदला है तो इस नगर का मिज़ाज और संस्कृति .....बस यू ही बना रहे बनारस का रस।

नीलम वन्दना (भोपाल)

Comments

  1. बचपन की यादें.. कौन भूल सकता है!!

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  2. Aapki esme bachapan ki yaaden kanha hai... Aapne to Banaras city ki tareef ki hai. Wo lagbhag sabko malum hai. Delhi

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